आमिर सेठ की कहानी

खुशियां तकदीर में होनी चाहिए तस्वीर में तो हर इंसान मुस्कुराता है 

एक छोटी सी कहानी

यह कहानी अमीर सेट की है जिसके पास बहुत सारा पैसा था बेशुमार दौलत थी बहुत सारे नौकर चाकर थे करने के लिए कोई काम नहीं था क्योंकि काम तो पहले ही हो जाता था सेठ जी आराम किया करते थे क्योंकि बहुत सारा समय उनके पास था चेंबर में एक दिन आराम से बैठे थे फिर उनके दिमाग में आया कि क्यों ना एक काम करें सारी प्रॉपर्टी कैलकुलेट करवाते हैं और पता करते हैं कि मेरे पास में कितना पैसा है 


अकाउंटेंट को बुलाया गया और बोला कि तुम्हारे पास 7 दिन है 7 दिन के बाद एक रिपोर्ट बना कर लाओ 7 दिन बाद मुझे बताओ कि कितना बिजनेस है कितने पैसे हैं अकाउंटेंट गया 7 दिन बाद वापस आया उसके हाथ में कोई कागज नहीं था कोई रिपोर्ट नहीं था तो सेठ जी ने कहा कि क्या हुआ रिपोर्ट कहां है  तो अकाउंटेंट ने कहा कि महाराज मैंने सारा कैलकुलेट कर लिया है आप बस सुनिए मेरी बात आपके पास इतना पैसा है कि आपकी आने वाली 7 जनरेशन कोई काम ना करें हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाए तब भी वह खा सकती हैं आपके पास बेशुमार पैसा है मलाई मार के वह जिंदगी जी सकते हैं सेठ जी खुश हो गए सेठ जी ने कहा एक काम करो फटाफट 10 से 15 दिन का टाइम लो आराम से कैलकुलेट करके बता देना कि मेरी प्रॉपर्टी कितनी है कितना पैसा है आराम से 10 से 15 दिन बाद रिपोर्ट दिखा देना



अब तुम जाओ अकाउंटेंट चला गया जैसे ही वह चैंबर से बाहर गया के तभी सेठ जी के दिमाग में दूसरा सवाल आ गया सेठ जी सोचने लगे कि 7 जनरेशन का पैसा तो हमारे पास में है ये तो अकाउंटेंट ने बता दिया लेकिन आठवीं जनरेशन का क्या होगा आठवीं पीढ़ी का क्या होगा अब  बात सेठ जी के मन में घर कर गई अब यह बात सेठ जी के मन में बैठ गई सेठ जी मन नहीं लग रहा था जब घर पहुंचे तो पहले अपने पोते के साथ खेलते थे लेकिन अब खेलना पसंद नहीं आ रहा था सेठानी जी से बात नहीं कर रहे थे सेठानी जी ने पूछने की कोशिश की लेकिन बता नहीं रहे थे

सेठ जी मन ही मन सोच रहे थे अगर सेठानी जी को बताया तो बोलेंगे क्या पागल वाली बात करें 7 जनरेशन का पैसा है आठवीं की चिंता कर रहे सेठ जी के दिमाग में ना चाहते हुए भी वह सवाल बार बार बार उनके दिमाग में चलने लगा सेठ जी ने सोचा क्या किया जाए अखबार पढ़ रहे थे तो उन्हें मालूम चला कि उनके शहर में एक संत की कथा थी कथा सुनने के लिए चले गए सोचा था कि मन नहीं लग रहा मन की शांति मिलेगी सलूशन मिल जाएगा महाराज जी से पूछ लूंगा सेठ जी गए वहां जाकर की कथा सुनी कथा के बाद में शाम हो चली थी

 

महाराज जी थे वह कथा सुनाने थे जाकर के उनके चरणों में बैठ गए और बोलने लगे आप जो बोलोगे पूजा करूंगा अब जो बोलोगे कथा करूंगा आपको दक्षिणा दूंगा बस मुझे मेरे सवाल का जवाब दो तो संत जो थे उन्होंने बोला कि क्या सवाल है फिर बोला कि मेरा सवाल यह है मेरे अकाउंटेंट ने बोला है सेठ जी आपके पास 7 जनरेशन का पैसा है आपके 7 पीढ़ी आएगी कोई काम नहीं करेगी आराम से बैठ कर खाएगी उतना पैसा है आप के पास परेशान होने की जरूरत नहीं है सात पीढ़ी तक का तो पैसा है लेकिन मुझे एक बात बताइए आठवीं पीढ़ी का क्या होगा

संत को सारी बात समझ में आ गई उन्होंने कहा कि आपको एक काम करना है बहुत सारा  दान नहीं करना है बहुत थोड़ा सा दान करना है लेकिन जिसे बता रहा हूं उसे ही जाकर के दान करना है तो सेठ जी ने कहा बताइए आप किसे दान करना है संत ने कहा कि जो आपके शहर में बसती है उस पुरानी बस्ती में एक झोपड़ी है आखरी में उसमें एक बुढ़िया रहती है उस बूढ़ी अम्मा के पास  पैसा नहीं है कपड़े नहीं है सही से खा नहीं पाती है बड़ी परेशान रहती हैं एक काम करो उनको जाकर के आधा किलो आटा दान कर दो बस इतना सा काम कर दो आपकी जिंदगी में कृपा आने लगेगी 

सेठ जी खुश हो गए मंत्र मिल गया जैसे ही कथा से निकले तुरंत नौकर को कॉल किया और बोला कि एक  क्विंटल एक क्विंटल बोरी भरकर गाड़ी में डालकर फटाफट से पुरानी बस्ती आ जाओ इधर से नौकर पहुंचा इधर से सेठ जी पहुंचे सेठ जी उस रास्ते पर चल दिए जो बताया था संत ने झोपड़ी मिल गई झोपड़ी का दरवाजा खटखटाया अम्मा बाहर निकली जैसे ही अम्मा बाहर आई सेठ जी चरणों में गिर गए और बोला की मां मुझे पता नहीं था आप यहां रहती हैं मैं तो बहुत बड़ा दानी हूं 



लंबी लंबी फेंकने लगे अम्मा को बात समझ में आ गई सेठ जी ने कहा कि अम्मा आपके लिए एक क्विंटल आटा लेकर के आया हूं आप इसे स्वीकार कर लीजिए अम्मा ने मना कर दिया कि क्या करूंगी बेटा मैंने तो आज खाना खा लिया है सेठ जी ने कहा कि अम्मा रख लीजिए महीने भर का राशन हो जाएगा आपको कोई भी परेशानी हो मुझे याद कीजिएगा अम्मा ने कहा कि बेटा नहीं चाहिए सेठ जी ने कहा कि एक  किलो आटा रख लीजिए दो-तीन दिन चल जाएगा अम्मा ने कहा कि बेटा नहीं चाहिए संत जी को तो मंत्र मिल गया था उनको आटा दान करना था

सेठ  जी ने कहा कि अम्मा एक काम कीजिए आप मेरी बात सुनो आधा किलो आटा रख लो बस अब आप मना नहीं करोगे कल के लिए आप का इंतजाम हो जाएगा तो अम्मा ने कहा कि बेटा आज का प्रबंध ऊपर वाले ने कर दिया है  मैंने खाना खा लिया है अब कल की चिंता मैं क्यों करूं आप से मुझे कोई दान नहीं चाहिए आप जाइए आराम कीजिए जैसे ही अम्मा ने यह बोला सेठ जी को समझ में आ गया महाराज जी ने यहां झोपड़ी में आने को क्यों भेजा था उन्हें सारी कहानी समझ में आई अम्मा जिन्हें कल की चिंता नहीं है 

इस कहानी से सीख मिलती है 

 छोटी सी जिंदगी जीवन में लालच की कोई सीमा नहीं है खुशियों की कोई सीमा नहीं है खुश होने वाला इंसान दाल चावल खाकर भी खुश हो जाता है और जिसे खुशी नहीं मिलती उसे पनीर खाने के बाद भी खुशी नहीं मिलती 


। धन्यवाद।


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