देनेवाला जब भी देता छप्पर फाड़ के

देनेवाला जब भी देता छप्पर फाड़ के
✶✶✶ एक गाँव में सोनू नाम का एक किसान रहता था, वह बहुत ही ईमानदार और भोला-भाला था, वह सदा ही दूसरों की सहायता करने के लिए हमेशा तैयार रहता था, और वह बहुत ही दयालु था।एक बार की बात है कि शाम के समय वह मैदान मैं (शौच) के लिए खेत की ओर गया, 

मैदान करने के बाद वह ज्योंही घर की ओर चला त्योंही उसके पैर में एक अरहर की खूँटी (अरहर काटने के बाद खेत में बचा हुआ अरहर के डंठल का थोड़ा बाहर निकला हुआ जड़ सहित भाग) गड़ गई, उसने सोचा कि यह किसी और के पैर में गड़े इससे अच्छा है

कि इसे उखाड़ दूँ, उसने जोर लगाकर खूँटी को उखाड़ दिया, खूँटी के नीचे उसे कुछ सोने की अशरफियाँ दिखाई दीं, उसके दिमाग में आया कि यह पता नहीं किसका है? किसी को इन मुद्राओं की जरूरत भी होगा? मैं क्यों लूँ? मुझे इसकी जरूरत नहीं है?अगर ये अशरफियाँ मेरे लिए हैं तो जिस राम ने दिखाया,

वह घर भी पहुँचाएगा (जे राम देखवने, उहे घरे पहुँचइहें), इसके बाद वह घर आकर यह बात अपने पत्नी को बताई, सोनू की पत्नी उससे भी बड़ी भोली थी; और उसने यह बात अपने पड़ोसी को बता दी, और पड़ोसी ने कहा कि मैं उस सोने को चुरा लूं तो मैं बहुत अमीर हो जाऊंगा।पड़ोसी बड़ा ही खुदगर्ज था, जब रात को  सभी लोग अपने
अपने घरों में चले गए और

उन्होंने खा-पीकर सो गए तो पड़ोसी ने अपने घरवालों को जगाया और कहा, ”चलो, हम लोग अशरफी कोड़ (खोद) लाते हैं,” पड़ोसी और उसके घरवाले कुदाल आदि लेकर खेत के लिए निकल गए और वह जब वहां पहुंचे तो जिस जगह सोनू ने बताया था, उन्होंने बताई हुई जगह पर कोड़ा (खोदा), सभी अवाक थे क्योंकि वहाँ एक नहीं पाँच-पाँच बटुलियाँ (धातु का एक पात्र) थीं पर सब में अशरफियाँ नहीं अपितु बड़े-बड़े पहाड़ी बिच्छू थे

पड़ोसी ने कहा कि सोनू ने हम लोगों को मारने की अच्छी योजना बनाई थी, हमें इसका प्रत्युत्तर देना ही होगा, उसने अपने घरवालों से कहा कि पाँचों बटुलियों को उठाकर ले चलो और सोनू का छप्पर फाड़कर इन बिच्छुओं को उसके घर में गिरा दो ताकि इन बिच्छुओं के काटने से मियाँ-बीबी दोनों की मौत हो जाए, घरवालों ने वैसा ही किया और सोनू के छप्पर पर बिच्छू को फेंक दिया।

बिच्छुओं को उसके घर में गिराने लगे, लेकिन धन्य है ऊपरवाला और उसकी लीला, जब ये बिच्छू घर में गिरे तो वह बिच्छू से सोने के मुद्रा बन गए सुबह-सुबह जब रामू उठा तो उसने अशरफियों (सोने के मुद्रा) को देखा देखा तो वह हैरान हो गया और उसने भगवान को धन्यवाद दिया और अपनी पत्नी से कहा, ”देखी! देनेवाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के

देनेवाला जब भी देता छप्पर फाड़ के

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है बच्चों

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी छोटी से छोटी लालसाओ को छोड़कर भगवान पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए और हमें किसी का भी बुरा नहीं करना चाहिए क्योंकि भगवान जब भी देता है छप्पर फाड़ के देता है।
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