बिना सोचे समझे कहानी

बिना सोचे समझे कहानी
बिना सोचे समझे कहानी

                          बिना सोचे समझे
✶✶✶ एक  शहर मैं कुछ ही दूरी पर एक मंदिर था उस मंदिर का निर्माण हो रहा था। मंदिर में लकडी का काम बहुत था इसलिए लकडी चीरने वाले बहुत से मजदूर काम कर रहे थे। यहां-वहां लकडी के लठ्टे पडे हुए थे और लठ्टे व शहतीर चीरने का काम चल रहा था। 

सारे मजदूरों को दोपहर का भोजन करने के लिए शहर जाना पडता था, इसलिए दोपहर के समय एक घंटे तक वहां कोई नहीं होता था। एक दिन खाने का समय हुआ तो सारे मजदूर काम छोडकर चल दिए। 

एक लठ्टा आधा चिराना रह गया था। आधे चिरे लठ्टे में मजदूर लकडी का कीला फंसाकर चले गए। ऐसा करने से दोबारा आरी घुसाने में आसानी रहती हैं। तभी वहां बंदरों का एक दल उछलता-कूदता आया। 

बिना सोचे समझे कहानी
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उनमें एक शरारती बंदर भी था, जो बिना मतलब चीजों से छेडछाड कर  रहता था। पंगे लेना उसकी आदत थी। बंदरों के सरदार ने सबको वहां पडी चीजों से छेडछाड न करने का आदेश दिया।

 सारे बंदर पेडों की ओर चल दिए, पर वह शैतान बंदर सबकी नजर बचाकर पीछे रह गया और लगा सामान छेड़ने लगा । उसकी नजर अधचिरे लठ्टे पर पडी। 

बस, वह उसी पर पिल पडा और बीच मेंअडाए गए कीले को देखने लगा। फिर उसने पास पडी आरी को देखा। उसे उठाकर लकडी पर रगडने लगा। उससे किर्रर्र-किर्रर्र की आवाज निकलने लगी तो।

बंदर को बहुत तेज गुस्सा आया। उन बंदरो की भाषा में किर्रर्र-किर्रर्र का अर्थ ‘निखट्टू’ था। और वह  उस कटे पेड़ को देखने लगा। उसके दिमाग में कौतुहल होने लगा और उसने निकाल दिया।

✶✶✶ अब वह कीले को पकडकर उसे बाहर निकालने के लिए जोर आजमा रहा था। लठ्टे के बीच फंसाया गया कीला तो दो पाटों के बीच बहुत मजबूती से जकडा हुआ था।

 क्योंकि लठ्टे के दो पाट बहुत मजबूत स्प्रिंग वाले क्लिप की तरह उसे दबाए रहते हैं। बंदर खूब जोर लगाकर उसे हिलाने की कोशिश करने लगा। कीला जोर लगाने पर हिलने व खिसकने लगा तो बंदर अपनी शक्ति पर खुश हो गया। 

वह और जोर से किर्रर्र-किर्रर्र  करता कीला सरकाने लगा। ऐसा करने के पश्चात  बंदर की पूंछ दो पाटों के बीच आ गई थी, जिसका उसे पता ही नहीं लगा। 

उसने उत्साहित होकर एक जोरदार झटका मारा और जैसे ही कीला बाहर खिंचा, लठ्टे के दो चिरे भाग फटा  से क्लिप की तरह जुड गए और बीच में फंस गई बंदर की पूंछ। 

बिना सोचे समझे कहानी
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बंदर चिल्ला उठा। तभी मजदूर वहां पहुंचे तो, बंदर और मजदूरों को  देखते ही बंदर ने भागने के लिए जोर लगाया तो उसकी पूंछ टूट गई। वह चीखता हुआ टूटी पूंछ लेकर भागा गया।

 शिक्षा:- बच्चों हमें इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है तो बच्चों हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमें बिना सोचे-समझे कोई काम नहीं करना चाहिए ।

।धन्यवाद।

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