राजा और चोर की कहानी

राजा और चोर की कहानी

राजा और चोर की कहानी

 ✶✶✶ मोनू नाम का एक चोर था। वह बहुत ही चतुर था।  और वह तेज दिमाग का था। लोगों का कहना था कि वह आदमी की आंखों का काजल तक उड़ा सकता था। एक दिन मोनू ने सोचा कि अब मैंने यहां पर बहुत चोरी कर ली है अब मैं दिल्ली जाऊंगा और अपना करतब दिखाऊंगा और चोरों के बीच अपनी धाक जमा लूंगा जिससे कि वह चोरों का सरदार बन जाऊंगा। यह सोचकर वह दिल्ली गया और उसने दिल्ली में जाकर एक नगर का चक्कर लगाया और उसने पता  कि सबसे ज्यादा यहां पर अमीर कौन है उसे पता चला कि इस नगर में राजा रहता है उसने सोचा कि राजा के यहां पर जाकर चोरी करूंगाऔर वह सोचने लगा कि राजा के पास तो बहुत सारे हीरे जवाहरात होंगे और वे राजा के महल के लिए निकल गया उसे पता ही नहीं था कि राजा का महल में चौकीदार दिन रात चौकीदारी करते रहते हैं वहां पर कोई परिंदा पर भी नहीं मार सकता। और उस महल में एक बहुत बड़ी घड़ी लगी होती है जो दिन रात का समय बताने के लिए घंटे बजाती रहती है और मोनू ने कुछ लोहे की कील खट्टी की और जब रात को घंटी ने 12 बजाय तो हर घंटे की  आवाज के साथ वह महल की दीवार पर एक-एक कील ठोकता चला गया घंटी की इतनी तेज आवाज होने के कारण किसी को भी पता नहीं चला। और उसने इसी तरीके से दीवार पर 12 केल ठोक दिए फिर उन्हीं के सहारे से वह दीवार पर चढ गया और महल में दाखिल हो गया और उसके बाद वह खजाने वाले कमरे में गया और उसने सारे हीरे जवाहरात चुरा लिए और वह वहां से भाग गया।अगले दिन जब चोरी का पता लगा तो मंत्री ने राजा को खबर दी राजा बड़ा हैरान हो गया और उसने मंत्रियों को आज्ञा दी कि शहर की सड़कों पर सिपाहियों की संख्या दोगुनी कर दी जाए यदि रात के समय किसी भी व्यक्ति को घूमते हुए पाया जाए तो उसे चोर समझकर गिरफ्तार कर लिया जाए।
  
✶✶✶ जिस समय दरबार में यह ऐलान हो रहा था, वह एक नागरिक के भेष में मोनू चोर मौजूद था। उसने सारी योजना की एक एक बात का पता चल गया। उसे फौरन यह भी पता लगा लिया कि कौन से छब्बीस सिपाही शहर में गश्त के लिए चुने गये हैं। वह सफाई से घर गया और साधु का बेस
 धारण करके उन छब्बीसों सिपाहियों की बीवियों से जाकर मिला। उनमें से हर एक इस बात के लिए उत्सुक थी कि उनके पति ही चोर को पकडे ओर राजा से इनाम ले। एक एक करके मोनू चोर उन सबके पास गया ओर उनके हाथ  देखकर बताया कि वह रात उसके लिए बडी शुभ है। उसक पति की पोशाक में मोनू चोर उसके घर आयेगा; लेकिन, देखो, मोनूचोर को अपने घर के अंदर मत आने देना, नहीं तो वह तुम्हें दबा लेगा। घर के सारे दरवाजे बंद कर लेना और भले ही वह पति की आवाज में बोलता सुनाई दे, उसके ऊपर जलता कोयला फेंकना। इसका नतीजा यह होगा कि मोनू चोर पकड में आ जायगा। सारी स्त्रियां रात को मोनू चोर के आगमन के लिए तैयार हो गईं। अपने पतियों को उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी। इस बीच पति अपनी गश्त पर चले गये और सवेरे चार बजे तक पहरा देते रहे। हालांकि अभी अंधेरा था, लेकिन उन्हें उस समय तक इधर उधर कोई भी दिखाई नहीं दिया तो उन्होंने सोचा कि उस रात को मोनू चोर नहीं आयगा, यह सोचकर उन्होंने अपने घर चले जाने का फैसला किया।  वे घर पहुंचे तो स्त्रियों को संदेह हुआ और उन्होंने मोनूचोर की बताई कार्रवाई शुरू कर दी। सिपाही जल गये ओर बडी मुश्किल से अपनी स्त्रियों को विश्वास दिला पाये कि वे ही उनके असली पति हैं और उनके लिए दरवाजा खोल दिया जाएं।

✶✶✶ सारे पतियों के जल जाने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया। दूसरे दिन राजा दरबार में आया तो उसे सारा हाल सुनाया गया। सुनकर राजा बहुत चिंतित हुआ और उसने कोतवाल को आदेश दिया कि वह स्वयं जाकर चोर पकड़े। उस रात कोतवाल ने तेयार होकर शहर का पहरा देना शुरू किया। जब वह एक गली में जा रहा रहा था, चोर ने जवाब दिया, ‘मैं चोर हूं।″ कोतवाल समझा कि लड़के उसके साथ मजाक कर रहे है। उसने कहा, ″मजाक छाड़ो ओर अगर तुम चोर हो तो मेरे साथ आओ। मैं तुम्हें काठ में डाल दूंगा।″ चोर बाला, ″ठीक है। इससे मेरा क्या बिगड़ेगा!″ और वह कोतवाल के साथ काठ डालने की जगह पर पहुंचा। वहां जाकर चोर ने कहा, ″कोतवाल साहब, इस काठ को आप इस्तेमाल कैसे किया करते हैं, मेहरबानी करके मुझे समझा दीजिए।″ कोतवाल ने कहा, तुम्हारा क्या भरोसा! मैं तुम्हें बताऊं और तुम भाग जाओं तो ?″ चोर बाला, ″आपके बिना कहे मैंने अपने को आपके हवाले कर दिया है। मैं भाग क्यों जाऊंगा?″ कोतवाल उसे यह दिखाने के लिए राजी हो गया कि काठ कैसे डाला जाता है। ज्यों ही उसने अपने हाथ-पैर उसमें डाले कि चोर ने झट चाबी घुमाकर काठ का ताला बंद कर दिया और कोतवाल को राम-राम करके चल दिया। जाड़े की रात थी। दिन निकलते-निकलते कोतवाल मारे सर्दी के अधमरा हो गया। सवेरे जब सिपाही बाहर आने लगे तो उन्होंने देखा कि कोतवाल काठ में फंसे पड़े हैं। उन्होंने उनको उसमें से निकाला और अस्पताल ले गये। अगले दिन जब दरबार लगा तो राजा को रात का सारा किस्सा सुनाया गया।

✶✶✶ राजा इतना हैरान हुआ कि उसने उस रात मोनू चोर की निगरानी स्वयं करने का निश्चय किया। मोनू चोर उस समय दरबार में मौजूद था और सारी बातों को सुन रहा था। रात होने पर उसने साधु का भेष बनाया और नगर के सिरे पर एक पेड़ के नीचे धूनी जलाकर बैठ गया। राजा ने गश्त शुरू की और दो बार साधु के सामने से गुजरा। तीसरी बार जब वह उधर आया तो उसने साधु से पूछा कि, ″क्या इधर से किसी अजनबी आदमी को जाते उसने देखा है?″ साधु ने जवाब दिया कि “वह तो अपने ध्यान में लगा था, अगर उसके पास से कोई निकला भी होगा तो मुझे पता नहीं। यदि आप चाहें तो मेरे पास बैठ जाइए और देखते रहिए कि कोई आता-जाता है या नहीं।″ यह सुनकर राजा के दिमाग में एक बात आई और उसने फौरन तय किया कि साधु उसकी पोशाक पहनकर शहर का चक्कर लगाये और वह साधु के कपड़े पहनकर वहां मोनू चोर की तलाश में बैठे। आपस में काफी बहस होने के बाद और दो-तीन बार इंकार करने के बाद आखिर मोनू चोर राजा की बात मानने को राजी हो गया ओर उन्होंने आपस में कपड़े बदल लिये। चोर तत्काल राजा के घोड़े पर सवार होकर महल में पहुंचा ओर राजा के सोने के कमरे में जाकर आराम से सो गया, बेचारा राजा साधु बना चोर को पकड़ने के लिए इंतजार करता रहा।


✶✶✶ सवेरे के कोई चार बजने आये। राजा ने देखा कि न तो साधु लौटा और कोई आदमी या चोर उस रास्ते से गुजरा, तो उसने महल में लौट जाने का निश्चय किया; लेकिन जब वह महल के फाटक पर पहुंचा तो संतरियों ने सोचा, राजा तो पहले ही आ चुका है, हो न हो यह चोर है, जो राजा बनकर महल में घुसना चाहता है। उन्होंने राजा को पकड़ लिया और काल कोठरी में डाल दिया। राजा ने शोर मचाया, पर किसी ने भी उसकी बात न सुनी। दिन का उजाला होने पर काल कोठरी का पहरा देने वाले संतरी ने राजा का चेहरा पहचान लिया ओर मारे डर के थरथर कांपने लगा। वह राजा के पैरों पर गिर पड़ा। राजा ने सारे सिपाहियों को बुलाया और महल में गया। उधर चोर, जो रात भर राजा के रुप में महल में सोया था, सूरज की पहली किरण पढ़ते  ही, राजा की पोशाक में और उसी के घोड़े पर रफूचक्कर हो गया। अगले दिन जब राजा अपने दरबार में पहुंचा तो बहुत ही हतरश था। उसने ऐलान किया कि अगर चोर उसके सामने उपस्थितित हो जायगा तो उसे माफ कर दिया जायगा और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जायगी, बल्कि उसकी चतुराई के लिए उसे इनाम भी मिलेगा। मोनू चोर वहां मौजूद था ही, फौरन राजा के सामने आ गया ओर बोला, “महाराज, मैं ही वह अपराधीह हूं।″ इसके सबूत में उसने राजा के महल से जो कुछ चुराया था, वह सब सामने रख दिया, साथ ही राजा की पोशाक और उसका घोड़ा भी। राजा ने उसे गांव इनाम में दिये और वादा कराया कि वह आगे चोरी करना छोड़ देगा। इसके बाद से मोनू चोर खूब आनन्द से रहने लगा। और वह खुशी खुशी रहने लगा।

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