किसान और उसके चार बेटों की कहानी

 नानी की कहानी

किसान और उसके चार बेटों की कहानी

किसान और उसके चार  बेटे एक छोटे से गांव में रहते थे परंतु उसकी मां  ना होने के कारण उसके बूढ़ा बाप बहुत चिंतित रहता था।
किसान और उसके चार बेटों की कहानी
  • किसान और उसके चार  बेटे एक छोटे से गांव में रहते थे परंतु उसकी मां  ना होने के कारण उसके बूढ़ा बाप बहुत चिंतित रहता था। 
  • उसके बेटे  हमेशा झगड़ा करते रहते थे किसान ने कई बार उन्हें समझाया पर उसकी बात कोई नहीं सुनता था हमेशा अपने पिता की बात को टाल दिया करते थे और गुस्से से बाहर चले जाते थे और उसके पिताजी उनको बाहर जाते देख बहुत ज्यादा चिंता करते रहते थे। कि मैं अपने चारों बेटों को एक साथ कैसे लाऊं कि यह लोग आपस में झगड़ा ना करें
किसान और उसके चार  बेटे एक छोटे से गांव में रहते थे परंतु उसकी मां  ना होने के कारण उसके बूढ़ा बाप बहुत चिंतित रहता था।
  • चारों भाई एक दूसरे का साथ कभी नहीं देते थे  और उसके पिताजी हमेशा अपने बेटों का चिंता में डूबा रहता था अतः उन सभी को सबक सिखाना चाहता था और उसने एक तरकीब लगाई और अपने चारों बेटों को अपने पास बुलाया 
  • और उसने कहा अपनी बेटों से कि तुम्हारे लिए मेरे पास एक काम है एक साधारण है और तुम इसे जरूर कर सकते हो और उसने लकड़ियों का गट्ठा लाया और उसनेअपने बेटे को दिया मैं चाहता हूं कि तुम इसे इस गड्ढे को दो हिस्से मैं तोड़ दो ऐसा करने के लिए सभी को एक एक बार मौका मिलेगा।

किसान और उसके चार  बेटे एक छोटे से गांव में रहते थे परंतु उसकी मां  ना होने के कारण उसके बूढ़ा बाप बहुत चिंतित रहता था।
  • सच में पिताजी यह बहुत ही आसान है और उसके भाई ने कहा की तुम तो यह कर ही नहीं सकते कोशिश भी मत करना उसमें से एक भाई ने कहा कि मैं तुमसे ज्यादा बलवान हूं मैं इसे बहुत आसानी से तोड़ दूंगा फिर  सबसे बड़े बेटे ने लकड़ियों के गट्टे को तोड़ने के लिए बहुत ही प्रयत्न किया परंतु यह लकड़ियों के गड्ढे नहीं टूटा बहुत हैरान हो गया अंत में उसने हार मान ली और दूसरे भाई ने भी बहुत कोशिश करी परंतु से भी नहीं टूट पाया और उसने गुस्से से वह लकड़िया का गट्ठा नीचे फेंक दिया बाकी के दोनों भाइयों ने भी दम लगा परंतु उनसे भी नहीं टूट पाया और सब लोगों ने हार मान लिया और  उसने अपने पिताजी से पूछने लगा कि बकवास है और उसने अपने पिताजी से कहा कि आपने ऐसा करने के लिए हमें क्यों कहा।

  • किसान ने लकड़ियों के गड्ढे को उठाया और उसने एक एक लकड़ी निकालकर अपने चारों बेटों को दे दिया और उसके चारों बेटों ने  एक एक लकड़ी को बहुत ही आसानी से तोड़ दिया फिर उसके पिताजी ने बोला मेरे बच्चों तुम इससे कुछ सीखो केवल एक लकड़ी आसानी से तोड़ दी जा सकती है  परन्तु तुम एक साथ रहना फिर तुम्हारा कोई भी बाल बांका नहीं कर सकता इस बार लड़कों को अपने पिताजी की बात समझ आ गई और चारों भाइयों ने आपस में मिल जुल कर रहना सीख लिया और साथ साथ मिलकर काम करने लगे और वे अपने खेतों में जाकर काम करने लगे और उन्होंने अपने खेतों में अनाज उगा दिए जिसके कारण अनाज को बेचा और उन्होंने उस पैसे को पिताजी को दिया और बेटों ने कहा कि हमें पिताजी एहसास हो गया है कि हमें हमेशा एक साथ मिलजुल कर काम करना चाहिए जिसके कारण हमें कोई भी  बाल बांका नहीं कर पाएगा और उन्होंने कहा कि एकता में ही बल।
किसान और उसके चार  बेटे एक छोटे से गांव में रहते थे परंतु उसकी मां  ना होने के कारण उसके बूढ़ा बाप बहुत चिंतित रहता था।

शिक्षा‌‍:-  हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि एकता में  बल होता है‌।
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